नहीं हो सकता नेत्रहीन रेप पीड़िता का गर्भपात, कोर्ट ने कहा- होने वाले बच्चे के नाम करें 10 लाख फिक्स डिपॉजिट

रांची। 19 वर्षीया नेत्रहीन रेप पीड़िता आदिवासी युवती के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह आने वाले बच्चे के नाम पर नेशनल बैंक में 10 लाख रुपये का फिक्स्ड डिपॉजिट कराएं, 21 वर्ष होने पर यह राशि उस बच्चे को मिल सकेगी. कोर्ट ने पीड़िता के लिए विकलांग पेंशन चालू करने का भी निर्देश सरकार को दिया. राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया है कि वह आने वाले बच्चे के प्री डिलीवरी एवं पोस्ट डिलीवरी की जिम्मेदारी वहन करें. कोर्ट ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि इस तरह के मामलों को देखते हुए रांची में शेल्टर होम खोलने पर विचार किया जाए.

कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस आदेश को राज्य के मुख्य सचिव, समाज कल्याण महिला व बाल विकास विभाग के सचिव, रांची डीसी एवं डालसा, रांची के सचिव को भी भेजने का निर्देश दिया है. उक्त आदेश राज्य सरकार को देते हुए कोर्ट ने मामले को निष्पादित कर दिया. इससे पहले मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान रिम्स निदेशक की ओर से कोर्ट को बताया गया था की पीड़िता का गर्भपात नहीं हो सकता है, क्योंकि वह 28 सप्ताह की गर्भवती है.

जिसके बाद कोर्ट ने रिम्स, राज्य सरकार और प्रार्थी के अधिवक्ता को इस मामले में आगे क्या किया जा सकता है इस पर आपस में बैठकर विचार करने को कहा था. पीड़िता की गर्भपात कराने की मांग मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने रिम्स निदेशक को मेडिकल बोर्ड गठित की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था. रिम्स की रिपोर्ट में कहा गया था कि गर्भ में बच्चा स्वस्थ है और उसे किसी तरह की कोई परेशानी नहीं है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एसके द्विवेदी की कोर्ट ने पीड़िता की क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई की. प्रार्थी के अधिवक्ता शैलेश पोद्दार ने पैरवी की.

क्या है मामला
आपको बता दें कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले दिनों पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई थी, जिसमें पीड़िता के 28 सप्ताह का गर्भ होने की बात बताई गई पीड़िता नगड़ी थाना क्षेत्र में रहती हैं. जब वह नाबालिग थी तो वर्ष 2018 में पहली बार उसके साथ रेप की घटना हुई थी, इससे संबंधित पोक्सो एक्ट के तहत भी मामला निचली अदालत में चल रहा है. दूसरी बार पीड़िता के साथ फिर से रेप की घटना हुई, इसके बाद अभी वह 28 सप्ताह की गर्भवती बताई जा रही है. पीड़िता ने अपनी आर्थिक स्थिति खराब होने का हवाला देते हुए कोर्ट से गर्भपात कराने की गुहार लगाई है. इस संबंध में प्रार्थी के अधिवक्ता ने बताया कि हाईकोर्ट में मामले से संबंधित याचिका दाखिल करने के पूर्व उन्होंने पीड़िता के इलाज के लिए जिले के उपायुक्त और डालसा के समक्ष भी आवेदन दिया था लेकिन इस संबंध में कोई सुनवाई नहीं हुई.

रिक्शा चालक पिता के सहारे जीवन बसर को मजबूर है पीड़िता
आपको बता दें पीड़िता के पिता रिक्शा चालक है .जब वह अपने काम पर गए थे उस दौरान युवती घर में अकेली थी. इसी दौरान उसके साथ रेप की घटना हुई, उसकी मां का स्वर्गवास हो गया है. वह पिता के साथ अकेले रहती है और वह गरीबी रेखा से नीचे आती है. उसके घर में न तो बिजली व्यवस्था है और न गैस की व्यवस्था है. इलाज के लिए उसके पास पैसे भी नहीं है. गर्भवती हो जाने पर उसने हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर करने के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने का आग्रह किया है. ताकि सुरक्षित गर्भपात हो सके.

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