बच्चों को तम्बाकू उत्पाद बेचने पर लगेगा एक लाख का जुर्माना और होगी 7 साल की सजा

रांची। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग एवं सोशियो इकोनॉमिक एण्ड एजुकेशनल डेवलॉपमेंट सोसाईटी (सीड्स) की ओर से दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिसमें जिला शिक्षा पदाधिकारी कमला सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्य के बारे में बताया. उन्होने अपने संबोधन में कहा कि तम्बाकू सेवन की आदत जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ी समस्या के रुप में वैश्विक स्तर पर उभर रहा है. अतः तंबाकू सेवन के दुष्परिणाम के प्रति अवयस्क और युवा वर्ग में जागरूकता फैलाना बहुत आवश्यक है.

कार्यशाला में मुख्य अतिथि के तौर पर उपस्थित सुनील कुमार भा.प्र.से. निदेशक, माध्यमिक शिक्षा-सह-राज्य नोडल पदाधिकारी (तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम) ने कहा कि तम्बाकू सेवन से हर साल देश में लगभग 13 लाख लोगों की मौत हो रही है. तम्बाकू सेवन से खास तौर पर बच्चों, अवयस्कों एवं युवा वर्ग के लोगों को बचाये जाने की आवश्यकता है. उन्होने कहा प्रायः ऐसा देखा जाता है कि राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के आस-पास तम्बाकू उत्पाद जैसे कि सिगरेट, बीडी़ पान मसाला, जर्दा एवं खैनी इत्यादि की बिक्री की जाती है. इससे कम आयु के युवाओं एवं छात्रों में धूम्रपान एवं तम्बाकू सेवन की व्यसन को बढ़ावा मिलता है. अवयस्क और युवा वर्ग तम्बाकू पर आधारित व्यापार एवं उद्योेगों के निशाने पर होते हैं, यह हमारे लिए एक गंभीर समस्या है.

सुनील कुमार ने कहा कि हम सब की जिम्मेदारी है कि अपने आनेवाले भविष्य की चिंता करते हुए युवाओं और अवयस्कों को तम्बाकू की लत से दूर रखा जाये. उन्होंने बताया कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखण्ड सरकार के मार्गदर्शन में सोसिओ इकोनॉमिक एण्ड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसायटी (सीड्स) झारखण्ड द्वारा “तम्बाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान (ToFEI) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप क्रियान्वयन हेतु साकारात्मक प्रयास किये जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि सीड्स झारखण्ड के सहयोग से स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखण्ड सरकार द्वारा राज्य के चार जिलों यथा, राँची, बोकारो, धनबाद एवं पूर्वी सिंहभूम को चिन्हित करते हुए पायलट बेसिस पर 10-10 विद्यालयों (5 सरकारी एवं 5 निजी) को मॉडल तम्बाकू मुक्त शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित करने का निर्णय किया है. आज रांची से इस मुहीम की शुरुआत हुई है और जल्द ही राज्य के अन्य जिलों के सभी विद्यालयों को तम्बाकू मुक्त शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा.

सीडस के कार्यपालक निदेशक दीपक मिश्रा ने तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम की आवश्यकता के बारे में विस्तारपूर्वक चर्चा की. उन्होने बताया कि ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (2019) द्वारा सम्पूर्ण विश्व में युवाओं द्वारा तम्बाकू सेवन से संबंधित जो आकडें संकलित किये गये हैं वह यह दर्शाता है कि भारत में 13-15 वर्ष के 8.5 प्रतिशत छात्रगण किसी न किसी प्रकार के तम्बाकू का उपयोग कर रहे हैं वहीं झारखण्ड मे यह 5.1 प्रतिशत है जो चिन्ता का विषय है. श्री मिश्रा ने बताया कि पिछले 7-8 वर्षों से झारखण्ड सरकार और सीड्स ने मिलकर राज्य एवं जिला स्तर पर तम्बाकू सेवन को नियंत्रित करने के लिए काफी प्रभावी कदम उठाये हैं. उन प्रयासों का प्रतिफल गेट्स 2 के रिपोर्ट में देखने को मिला था, जिसके मुताबिक हमारे राज्य में तम्बाकू सेवन करने वालों का प्रतिशत 50 .1 % से घट कर 38.9 % पर आ गया था. लेकिन हम अभी भी राष्ट्रीय औसत (28.6%) से काफी ऊपर हैं. कार्यक्रम में जिला तम्बाकू नियंत्रण कोषांग के नोडल पदाधिकारी, सीड्स के सभी पदाधिकारी, सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, रांची के चयनित विद्यालय के प्राचार्य, नोडल शिक्षक, छात्र छात्राएं एवं मीडिया कर्मी उपस्थित हुए.

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