रामगढ़।मनरेगा कर्मचारी संघ रामगढ़ झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी महासंघ तीन दिवसीय सांकेतिक हड्ताल होने के पश्चात अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरुआत हो गई। 18जुलाई से 20.जुलाई 2024 तक सांकेतिक हड़ताल की गई थी और झारखण्ड सरकार से उम्मीद की जा रही थी कि सफल वार्ता हेतु करेगा कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों को बुलावा आयेगा। परन्तु सरकार इस पर पूर्णतः असंवेदनशील रही। मनरेगाकर्मियों मांग पर कोई विचार नहीं किया गया। अन्त में मनरेगाकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिये बाध्य हो गये। विगत 17 वर्षों से मनरेगा कर्मी अति अल्प मानदेय पर इस उम्मीद पर कार्य करते रहे कि एक समय सीमा के बाद हमारी सेवा स्थायी हो जायेगी।
पख्तु यह उम्मीद सिर्फ उम्मीद ही बनकर रह गई। अब हेमन्त सोरेन अपने चुनावी जनसभाओं में तथा रात्रि चौपाल के माध्यम से वादा किये थे कि सभी संविदा / अनुबंधकर्मियों की सेवा नियमित कर दी जायेगी लेकिन सरकार बनने के बाद हेमन्त सोरेन अपने वादे से मुकर गई। अब सरकार का कार्यकाल भी समाप्ति के कगार पर है परन्तु हमारी मांग ज्यों के त्यो है। वर्तमान में हमारी एकसूत्री मांग है वेतनमान के साथ स्थायीकरण। मनरेगाकर्मी इस हड़ताल पर तब तक डटे रहेंगे जब तक हमारी मांग पूरी नहीं हो जाती। हम मनरेगाकर्मियों राज्य सरकार चुनाव से लेकर अन्य कई ग्रामीण विकास विभाग से संबंधित कार्य करवाती है।
इसके एवज में कोई अतिरिक्त मानदेय नहीं दिया जाता है। फिर भी हम मनरेगाकर्मी सरकार के हर आदेश का पालन करते हैं लेकिन हमारे साथ सरकार द्वारा भेदभाव किया जाता है, हमें बंधुआ मजदूर समझा जाता है, शोषण की सीमा पार हो जाती है। अत: हम सब शोषित जीवन जीने के लिये बाध्य हैं। अगर सरकार अब भी हमारी मांग पर सरकारात्मक फैसला नहीं करती है तो यह उग्र होगा। अतः सरकार से उम्मीद करते हैं कि यथाशीघ्र हमारी मांग वेतनमान के साथ स्थायीकरण’ पर सकारात्मक निर्णय ले जिससे मनरेगा कार्य की प्रगति पर कोई प्रतिकूलता न पड़े। मौके पर। सुरेन्द्र प्रसाद जे ई सुमित कुमार शत्रुघ्न सिन्हा महेंद्र राम योगेश्वर रविदास अरुण राम दीपक कुमार गुप्ता आशीष मंकी प्रसादी महतो रूपेश कुमार लखन मुंडा ललित राम गणेश रजक दशरथ यादव बालेश्वर महतो आदि मौजूद थे



