फोटो : पतरातू रेलवे स्टेशन स्थित लोहे का ब्रिज जिसे संवेदक द्वारा रास्ते को किया गया अवरुद्ध
पतरातू
रेलवे कॉलोनी से रेलवे स्टेशन पतरातू तक पैदल जाने व आने के लिए एक संकीर्ण लोहे के ब्रिज बीते कई दशकों से बना हुआ है। उसी ब्रिज के बगल से एक नए ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है। ब्रिज बनाने वाला संवेदक अपनेके द्वारा पुराने ब्रिज के रास्ते को अवरुद्ध कर मनमानी तरीके से काम किया जा रहा है। जिस कारण आने-जाने वाले रेलकर्मी व अन्य राहगीरों और बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले वाले ब्रिज से लोग आना-जाना करते हैं लेकिन दूसरे ब्रिज के करण पहले ब्रिज पर टीने का एस्बेस्टस लगाकर ब्रिज के रास्ते को जाम कर दिया गया है। ताकि उसके आगे कोई जा नहीं सकता। नतीजा है कि अन्य राहगीरों को एक नंबर प्लेटफार्म से होकर बाहर जाना पड़ता है।
जो रेलवे स्टेशन परिक्षेत्र में बिना प्लेटफार्म टिकट के जाना कानून अपराध है। साथ ही लोगों को कई एक सीढ़ियां उतरना पड़ता है छोटे-छोटे बच्चे जो साइकिल से सेंट्रल स्कूल या रेल श्रमिक विद्यालय जाते हैं उन बच्चों को एक नंबर प्लेटफार्म से होकर पुराना ब्रिज में चढ़ना पड़ रहा है। एक नंबर प्लेटफार्म से पुराना ब्रिज पर चढ़ने के लिए लम्बी सीढ़ि है बच्चे साइकिल कंधे में लेकर चढ़ते हैं और उतरते हैं जो खतरनाक हैं। टीना का एस्बेस्टस से जो रोक लगाया गया है उसको हटा देना चाहिए। जहां काम हो रहा है उसके बगल में रास्ते में घेरा लगाना चाहिए। उक्त रास्ते के घेराबंदी से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उक्त परेशानी की शिकायत सभी लोग कर रहे हैं। घेराबंदी के रास्ते से महिला, पुरुष, बच्चे बुढ़े हो सारे लोगों को उसी रास्ते से यानि 1 नंबर प्लेटफार्म से जाना पड़ रहा है। जो बच्चों व बुजुर्गों के लिए खासकर सुरक्षित नहीं है। वहीं हर एक पल एक नंबर प्लेटफार्म से रेलवे की ट्रेनें गुजरती रहती है



