फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निबंधित “झारखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन” पर विभागीय मंत्री ने दिए जांच के आदेश ।

राज्य , ब्यूरो । झारखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन जमशेदपुर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एवं संस्था निबंधन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत का एक मामला प्रकाश में आया है, शिकायतकर्ता अमित कुमार सिंह (देवघर) ने विभागीय मंत्री हाफिजुल हसन को लिखित आवेदन देते हुए “झारखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन” (जमशेदपुर) जिसके महासचिव उत्तमचंद है , उन पर गलत दस्तावेजों के आधार पर एवं संस्था निबंधन अधिनियमों का उल्लंघन करते हुए , कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से पूर्व से निबंधित संस्था के नाम से निबंधन कराने एवं निबंधन के समय फर्जी दस्तावेजों को इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है,जिस पर विभागीय मंत्री ने अपर सचिव निबंधन को सघन जांच करने के आदेश भी दे दिए हैं।

पूर्व से निबंधित संस्था के नाम से ही कर दिया फिर से निबंधन ।

संस्था निबंधन विभाग ने पूर्व से निबंधित संस्था झारखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन (झारखंड राज राइफल संघ ) निबंधन संख्या – 520 /2018. जो कि पूर्व से निबंधित है ,उसी के नाम से पुनः झारखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन , निबंधन संख्या- 2642/2020 को निबंधित कर दिया , जोकि सरासर संस्था निबंधन नियम के विरुद्ध है ।

एक ही परिवार के कई सदस्य बन गए हैं पदाधिकारी।

संस्था निबंधन अधिनियम के अनुसार एक संस्था में ब्लड रिलेशन नहीं रह सकते हैं , लेकिन इस संस्था में पांच ऐसे सदस्य हैं जोकि ब्लड रिलेटिव है,
जगन्नाथ सिंह , बैजनाथ सिंह , पिता – (पूर्वेंदु नारायण सिंह ) , लाल प्रदीप कुमार सिंह , लाल प्रमोद कुमार सिंह , पिता – (लाल प्रफुल्ल कुमार सिंह ) , लाल मयंक कुमार सिंह ,पिता – (लाल प्रदीप कुमार सिंह ) यह सभी इस संस्था में सदस्य व पदाधिकारी पद पर पदस्थापित हैं , जोकि सरासर संस्था निबंधन अधिनियम के उल्लंघन को दर्शाता है।

आम सभा की बैठक में बिना उपस्थित हुए ही बन गए पदाधिकारी ।

जब किसी संस्था का निर्माण होता है , उस समय एक कार्यकारिणी बनने के लिए आम सभा की बैठक को बुलाया जाता है , जिस में उपस्थित सभी व्यक्तियों के नाम व हस्ताक्षर किए जाते हैं , इसी आमसभा के सदस्यों के बीच से संस्था के पदाधिकारियों का चयन सुनिश्चित किया जाता है , परंतु झारखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन की आम सभा की बैठक में जो पांच व्यक्ति उपस्थित ही नहीं थे , नित्यानंद सिंह , जयेश अमीन , लाल प्रमोद कुमार सिंह , श्रवण अग्रवाल , आनंद अग्रवाल , नहीं इनके हस्ताक्षर आम सभा की बैठक में मौजूद हैं , वह कार्यकारिणी में पदाधिकारी व सदस्य की भूमिका में देखे जा सकते हैं जोकि संस्था निबंधन नियम के विरुद्ध है।

राज्य के बाहर के व्यक्ति को बनाया कार्यकारिणी सदस्य ।

झारखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन में कार्यकारी सदस्य की भूमिका में वरुण ढाल, पिता – बिरेंद्र कुमार ढाल का पता , मेट्रो बेवरेज प्राइवेट लिमिटेड, बिहाइंड मेट्रो प्लाजा , कतरास रोड मटकुरिया धनबाद , दर्शाया गया है , परंतु संस्था निबंधन के समय जो आधार कार्ड उन्होंने दिया है , उस पर ढाल निवास , आसनसोल वेस्ट बंगाल का पता अंकित है , एवं उन्होंने धनबाद के लिखे पता का निबंधन के समय कोई भी प्रमाण नहीं दिया है, जो सरासर संस्था निबंधन नियम के विरुद्ध है ।

संस्था निबंधन के समय गलत शपथ -पत्र को किया दाखिल ।

उत्तमचंद द्वारा जो शपथ-पत्र दाखिल किया गया है , उसमें कहीं भी संस्था का नाम अंकित नहीं है , ताकि यह साबित हो सके कि यह शपथ-पत्र किस कार्य के लिए दिया गया है , और उन्होंने अपने शपथ-पत्र में यह भी घोषणा की है , कि उनकी संस्था में किसी भी व्यक्ति का आपस में परिवारिक संबंध नहीं है , जोकि सरासर गलत है , निबंधन विभाग को भ्रमित करने के लिए फर्जी शपथ-पत्र दाखिल करना भी एक कानूनन अपराध है , लेकिन अभी तक उत्तमचंद पर विभाग द्वारा कोई भी कार्यवाही क्यों नहीं की गई , यह भी संस्था निबंधन के पदाधिकारियो की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करता है ।

अपर सचिव निबंधन को सघन जांच करने दिया है आदेश – मंत्री

वही विभागीय मंत्री हाफिजुल हसन को मिले लिखित आवेदन पर मंत्री ने अपर सचिव निबंधन को सघन जांच करने दिया है , साथ ही साथ उन्हों ने आवेदनकर्ता को अस्वासन भी दिया है की इस भ्रष्टाचार में दोसी पाए जाने वाले अधिकारियो पर कठोर कार्यवाई होगी |

संस्था निबंधन पदाघिकारी की मिलीभगत के बिना यह नहीं – सचिन

पूर्व से निबंधित संस्था झारखण्ड स्टेट राइफल एसोसिएशन ( झारखण्ड राज्य राइफल संघ ) के महासचिव सचिन कुमार सिंह ने कहा है , की इतनी त्रुटियों के बावजूद भी अगर किसी संस्था का निबंधन होता है , तो यह साफ-साफ संस्था निबंधन के पदाधिकारियो के भ्रष्टाचार को दर्शाता है , संस्था निबंधन विभाग के कई पदाघिकारी दसियो साल से एक ही विभाग में अपने – अपने कूल्हे टिका कर बैठे है , और कई तो ऐसे भी है जो झारखण्ड बनने के बाद से ही निबंधन विभाग को पकड़ कर बैठे है , तो इस विभाग में भ्रष्टाचार का जन्म लेना कोई आश्चर्य की बात नहीं , विभगीय मंत्री को ऐसे भ्रष्टाचारियो पर सख्त कार्यवाई करने की जरूरत है |

इतनी त्रुटियों के बावजूद भी संस्था निबंधन विभाग द्वारा झारखंड स्टेट राइफल एसोसिएशन को निबंधित कर देना निबंधन पदाधिकारियों की भूमिका पर सवालिया निशान खड़ा करता है , इतनी त्रुटियों को क्यों नजर अंदाज किया गया , इस संस्था के निबंधन मैं सम्मिलित जितने भी पदाधिकारी हैं ,उनकी भूमिका भी सवालों के घेरे में है , विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा अभी तक उन पर गाज क्यों नहीं गिरी यह भी एक सोचने का विषय है ।

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