दिव्यांग खाता धारक बैंक के रवैया से तंग हो जीप सदस्य से लगाया गुहार

सेन्हा/लोहरदगा। बैंक ऑफ इंडिया शाखा सेन्हा में को दिव्यांग व वृद्धा खाता धारक के लिए नही होता है वैकल्पिक व्यवस्था बुधवार को खाताधारक परेशान हो जीप सदस्य से लगाया गुहार सेन्हा प्रखंड मुख्यालय स्थित संचालित बैंक ऑफ इंडिया शाखा सेन्हा में दिव्यांग व वृद्धा अवस्था के लोगो के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कराने में शाखा प्रबंधक असमर्थ नितदिन खाता धारक बैंक का काट रहा चक्कर ऐसा ही एक मामला प्रकाश में आया है। जो तीन दिन से बैंक का चक्कर खाता धारक रंथू उराँव अपने पुत्र के साथ चक्कर काट रहा है। जो लकवा ग्रसित होने के बाबजूद वृद्ध अवस्था में है। और दूसरे मंजिल पर बैंक कार्यालय संचालित होने के कारण दिव्यांग,वृद्ध अवस्था के लोग बैंक कार्यालय जाने में असमर्थ हो जाते हैं। वैसे लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करवाने का निर्देश पूर्व में बैंकों को दिया गया है। परंतु इन सभी बातों को नजर अंदाज कर नियम की दुहाई देने तथा सलाहकार का भूमिका निभाने का कार्य किया जाता है। और उन दिव्यांग व वृद्ध अवस्था के लोगों को सुविधा मुहैया कराने का कार्य छोड़ परेशान करने का कार्य काफी समय से चल रहा है। तथा किसी खाता धारक की शिकायत पर शाखा प्रबंधक चुपी साध लाभुक को उलझाने का कार्य किया जाता है। और कार्य की परेशानी बता कर अक्सर बैंक परिसर से बाहर शाखा प्रबंधक का होने की बात बताई जाती है। इन सभी बातों से तंग हो एक दिव्यांग खाता धारक रंथू उराँव के पुत्र लाल बहादुर उराँव अपने पिता की स्थिति से अवगत कराते हुए सुविधा मुहैया करवाने का अपील जिप सदस्य रामलखन प्रसाद से किया। दिव्यांग खाता धारक की समस्या से अवगत होते हुए श्री प्रसाद ने शाखा प्रबंधक राजेन्द्र तिवारी से संपर्क कर सुविधा मुहैया करवाए। जबकि तीन दिन से खाता धारक बैंक का चक्कर लगा रहा था परंतु कोई बैंक कर्मी उस दिव्यांग का फरियाद सुनने को नही था। जीप सदस्य रामलखन प्रसाद ने बताया कि सभी बैंक में यह नियम लागू है कि दिव्यांग,वृद्धा जो चलने फिरने में असमर्थ है उसके लिए शाखा प्रबंधक का दायित्व होनी चाहिए कि उस खाता धारक को बैंक सुविधा कैसे पहुंचाए। और वैसे लोगों के लिए प्राथमिकता देने वाले अलग काउंटर उपलब्ध होनी चाहिए लेकिन इन सभी नियम को ताख पर रख शाखा प्रबंधक द्वारा मनमानी कर खाता धारक को गुमराह करने का कार्य किया जाता है। बार बार खाता धारक द्वारा गुहार लगाने के बाबजूद सुनने को तैयार नही है।

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