यमन के हूती लड़ाके अक्सर पारंपरिक कपड़ों और साधारण चप्पलों में नजर आते हैं। इसके बावजूद यह संगठन मिसाइल, ड्रोन और दूसरे आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल के लिए जाना जाता है। सवाल उठता है कि आधुनिक हथियार रखने वाले हूती लड़ाके नियमित सेना जैसी वर्दी और सैन्य जूते क्यों नहीं पहनते?

हूतियों का आधिकारिक नाम अंसार अल्लाह है। यह आंदोलन उत्तरी यमन के सादा क्षेत्र में जायदिया शिया समुदाय के बीच उभरा। इसकी शुरुआत 1990 के दशक में एक धार्मिक-सामाजिक आंदोलन के रूप में हुई थी। बाद में संघर्ष बढ़ने के साथ यह एक सशस्त्र राजनीतिक और सैन्य संगठन में बदल गया।

चप्पल और पारंपरिक कपड़े क्यों?

चप्पल हूतियों की कोई आधिकारिक सैन्य वर्दी नहीं है। यमन के ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में पारंपरिक कपड़े और साधारण चप्पल आम पहनावा हैं। हूती आंदोलन भी इन्हीं स्थानीय परिस्थितियों से विकसित हुआ है।

इसके अलावा हूतियों की लड़ाई लंबे समय तक पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में गुरिल्ला शैली में हुई। ऐसे में नियमित सेना की तरह एक जैसी वर्दी पहनना जरूरी नहीं था। स्थानीय कपड़ों में रहने से लड़ाके आम लोगों के बीच आसानी से घुल-मिल भी सकते हैं।

2004 के बाद बढ़ा सशस्त्र संघर्ष

वर्ष 2004 में हूती आंदोलन और यमन सरकार के बीच खुला सैन्य संघर्ष शुरू हुआ। इसके बाद कई वर्षों तक लड़ाई जारी रही। 2011 की अरब स्प्रिंग के दौरान यमन में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी और हूतियों ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए अपना प्रभाव बढ़ाया।

साल 2014 में हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद यमन का संघर्ष और गंभीर हो गया। 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में सैन्य हस्तक्षेप किया, जिससे यह संघर्ष क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष का हिस्सा बन गया।

ईरान से मदद का भी आरोप

हूतियों को ईरान से सैन्य, तकनीकी और अन्य सहायता मिलने की बात लंबे समय से सामने आती रही है। हालांकि ईरान हूतियों को सीधे नियंत्रित करने से इनकार करता है। विशेषज्ञों के अनुसार हूतियों का अपना स्थानीय राजनीतिक और सैन्य एजेंडा भी है।

आज हूती केवल स्थानीय लड़ाकों का समूह नहीं है। संगठन के पास राजनीतिक ढांचा और महत्वपूर्ण सैन्य क्षमता है। मिसाइल और ड्रोन के इस्तेमाल के अलावा लाल सागर में जहाजरानी को प्रभावित करने की क्षमता भी हूतियों ने दिखाई है।

इसलिए चप्पल और पारंपरिक कपड़ों में दिखने वाले हूती लड़ाकों की तस्वीर को उनकी सैन्य क्षमता का पैमाना नहीं माना जा सकता। उनका पहनावा स्थानीय संस्कृति और गुरिल्ला संघर्ष की पृष्ठभूमि से जुड़ा है, जबकि संगठन की सैन्य क्षमता काफी आधुनिक हो चुकी है।

Desk Desk · 12-09-2026 02:33 PM · 📍 Ranchi
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