रांची | चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। इस दौरे को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में आए तनाव के बीच शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आए हैं। उनके साथ चीन का बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जिसमें चीन के दो प्रमुख नेता काई की और विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं।

कौन हैं काई की?

काई की को शी जिनपिंग के बेहद करीबी नेताओं में माना जाता है और उन्हें अक्सर उनका 'दाहिना हाथ' कहा जाता है। दोनों नेताओं का साथ कई दशकों पुराना है। वर्ष 1996 में जब शी जिनपिंग फुजियान में महत्वपूर्ण पद पर थे, तब काई की उनके सहयोगी के तौर पर जुड़े थे।

बाद में काई की बीजिंग के मेयर भी रहे। वर्ष 2022 में उन्हें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सेक्रेटेरिएट का फर्स्ट सेक्रेटरी बनाया गया और 2023 में वह पार्टी के जनरल ऑफिस के निदेशक बने। हालांकि चीन में आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री ली च्यांग को नंबर दो नेता माना जाता है, लेकिन राष्ट्रपति के बेहद करीब होने के कारण काई की की भूमिका काफी प्रभावशाली मानी जाती है।

वांग यी भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल

शी जिनपिंग के साथ चीन के विदेश मंत्री वांग यी भी भारत आए हैं। भारत-चीन संबंधों में सीमा विवाद के साथ-साथ व्यापार और निवेश जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में वांग यी की मौजूदगी भी इस दौरे को कूटनीतिक रूप से अहम बनाती है।

मोदी-शी वार्ता पर निगाहें

इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच सीधी बातचीत होने वाली है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों, सीमा पर शांति और व्यापार समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ा था। हालांकि हाल के वर्षों में दोनों नेताओं की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुलाकात हुई है और सीमा से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच भी बातचीत आगे बढ़ी है। ऐसे में शी जिनपिंग का भारत दौरा दोनों देशों के संबंधों को सामान्य दिशा में आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Desk Desk · 12-09-2026 02:05 PM · 📍 Ranchi
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