नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन, मोती बाग इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत और बचाव दल मौके पर लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं।

बताया जा रहा है कि हादसे का शिकार हुई इमारत करीब 50 साल पुरानी थी और इसमें पीजी संचालित किया जा रहा था। जानकारी के मुताबिक, इमारत में करीब 50 छात्र रहते थे।

बेसमेंट में चल रहा था रेनोवेशन का काम

हादसे को लेकर सबसे बड़ा सवाल इमारत के बेसमेंट में चल रहे काम को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि हादसे के समय बेसमेंट में तोड़फोड़ और रेनोवेशन का काम चल रहा था।

करीब 21 सेकंड का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें बेसमेंट में गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बेसमेंट में किए जा रहे काम का इमारत के ढहने से कोई सीधा संबंध था या नहीं।

आरोप है कि इमारत का निर्माण छोटे से करीब 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बिना स्वीकृत नक्शे और पर्याप्त पिलर के किया गया था। हालांकि, इन दावों की पूरी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

NDRF ने संभाला मोर्चा

हादसे की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस और अन्य राहत-बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं। रेस्क्यू टीम कटर और दूसरे उपकरणों की मदद से भारी स्लैब और मलबे को हटाकर लोगों की तलाश कर रही है।

मलबा काफी भारी होने के कारण बचाव अभियान सावधानी से चलाया जा रहा है। अधिकारियों की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है।

मकान मालिक गिरफ्तार

हादसे के बाद पुलिस ने मकान मालिक हरिराम गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। पुलिस के अनुसार, हादसे के बाद फरार बताए जा रहे हरिराम गुप्ता के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया था।

इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीमों ने कई स्थानों पर छापेमारी की और उसे राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस अब मकान के निर्माण, कथित अवैध निर्माण और बेसमेंट में चल रहे रेनोवेशन से संबंधित पहलुओं पर उससे पूछताछ कर रही है।

MCD के पांच अधिकारी निलंबित

हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एमसीडी के पांच अधिकारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी दी है।

निलंबित अधिकारियों में डिप्टी कमिश्नर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सुपरिटेंडेंट इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं।

इसके अलावा आसपास मौजूद कथित अवैध इमारतों को लेकर भी प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। कुछ मकानों को खाली करने या गिराने के लिए नोटिस और समयसीमा दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

हादसे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज

सत्य निकेतन हादसे के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और एमसीडी में सत्तारूढ़ भाजपा पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।

हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

प्रारंभिक जानकारी में यह भी सामने आया है कि 2022 में इसी इलाके में बेसमेंट निर्माण के दौरान एक हादसा हुआ था। इसके बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि अगर इलाके में पहले भी निर्माण संबंधी समस्या सामने आई थी, तो अवैध निर्माण के खिलाफ समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

55 वर्ग गज के प्लॉट पर 5 मंजिला इमारत, उठे कई सवाल

इस हादसे ने दिल्ली में अवैध निर्माण और बिल्डिंग सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • 55 वर्ग गज के प्लॉट पर पांच मंजिला इमारत कैसे बनी?
  • क्या इमारत का निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार हुआ था?
  • बेसमेंट में रेनोवेशन के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं?
  • अगर निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ था, तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
  • क्या पहले की शिकायतों या घटनाओं के बावजूद निर्माण जारी रहने दिया गया?

इन सभी सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद सामने आने की उम्मीद है।

फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

सत्य निकेतन में राहत और बचाव अभियान अभी जारी है। मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है और प्रशासन हादसे के कारणों की जांच में जुटा है।

हादसे की वास्तविक वजह क्या थी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

Desk Desk · 08-09-2026 03:45 PM · 📍 Ranchi
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