नई दिल्ली |नई दिल्ली में चल रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों के नेताओं को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि BRICS का सहयोग केवल सरकारों के बीच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंचना चाहिए।
पीएम मोदी ने दुनिया में बढ़ते तनाव, महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आज कोई भी संकट केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। ऐसे में BRICS को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी क्षमता और तैयारी मजबूत करनी होगी।
उन्होंने बताया कि संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए BRICS Integrated Early Warning System पर सहमति बनी है। साथ ही आपदा प्रबंधन के लिए Early Warning Data Integration Guidelines भी तैयार की गई हैं।
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक संकटों का सबसे ज्यादा सामना करते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भूमिका अभी भी सीमित है। उन्होंने कहा कि इन्हें केवल नियमों का पालन करने वाले देशों के बजाय नियम बनाने में भागीदार बनाया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ के युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को प्रशिक्षण, बातचीत कौशल और कानूनी विशेषज्ञता देने का सुझाव भी दिया।
पीएम मोदी ने कहा कि BRICS की असली ताकत उसकी विविधता और सहयोग में है। उन्होंने जोर दिया कि BRICS में तैयार होने वाले समाधान सिर्फ सदस्य देशों तक सीमित न रहें, बल्कि ग्लोबल साउथ की जरूरतों के मुताबिक उन्हें व्यापक स्तर पर लागू किया जाए।
Blog





