चतरा/वाराणसी। झारखंड के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीएसपीसी के सुप्रीमो और 30 लाख रुपये के इनामी ब्रजेश गंझू को उत्तर प्रदेश एटीएस ने मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस के अनुसार, उस पर हत्या समेत 50 से अधिक मामले दर्ज थे। अकेले चतरा जिले में उसके खिलाफ 39 नक्सली मामले दर्ज होने की बात सामने आई है।

ब्रजेश गंझू चतरा के लावालौंग थाना क्षेत्र के लूटू-सोहावन गांव का रहने वाला था। उसे गोपाल सिंह भोक्ता, दुलारचंद गंझू, रंजन गंझू और ‘सरदार जी’ समेत कई नामों से जाना जाता था। शुरुआती दौर में उसने माओवादी संगठन से जुड़कर गतिविधियां शुरू की थीं। बाद में माओवादियों से अलग होकर स्थानीय कमांडरों के साथ मिलकर टीएसपीसी के गठन में भूमिका निभाई और संगठन का प्रमुख बन गया।

‘डॉक्टर’ से मिले इनपुट के बाद एजेंसियों को मिली लोकेशन

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रजेश गंझू तक पहुंचने में टीएसपीसी के सब-जोनल कमांडर उमेश सिंह खेरवार उर्फ ‘डॉक्टर’ से मिले इनपुट अहम रहे। उमेश को सितंबर 2025 में सोनभद्र से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने उससे पूछताछ के आधार पर लंबे समय तक ब्रजेश की गतिविधियों और लोकेशन पर काम किया।

मुठभेड़ में पुलिसकर्मी भी रहे निशाने पर

यूपी एटीएस के अनुसार, वाराणसी के रामनगर इलाके में टीम ने ब्रजेश को रोकने की कोशिश की थी। पुलिस का दावा है कि इसी दौरान उसने फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक, फायरिंग में एटीएस के डिप्टी एसपी और एक हेड कांस्टेबल की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी गोली लगी, हालांकि दोनों सुरक्षित रहे।

ब्रजेश के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों का अभियान लंबे समय से चल रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, कोयला परियोजनाओं से जुड़ी कथित वसूली और टेरर फंडिंग की जांच के बाद टीएसपीसी पर सुरक्षा एजेंसियों का दबाव बढ़ा और संगठन के कई बड़े कमांडर या तो गिरफ्तार हुए, मारे गए या उन्होंने आत्मसमर्पण किया।

Desk Desk · 21-09-2026 01:34 PM · 📍 Chatra
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