मुंबई। अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ में विजय सालगांवकर एक बार फिर पुलिस की जांच के घेरे में है। इस बार उसके सामने पहले से ज्यादा मजबूत सबूत और तेज-तर्रार पुलिस अधिकारी राजवीर सिंह तोमर हैं। फिल्म के क्लाइमैक्स में विजय एक ऐसी योजना सामने लाता है, जिसकी तैयारी उसने पुलिस की कार्रवाई से काफी पहले शुरू कर दी थी।
दो सवालों पर टिकी पूरी जांच
फिल्म के तीसरे भाग में पुलिस के सामने मुख्य सवाल दो हैं—23 जुलाई को विजय वास्तव में कहां था और क्रिस्टोफर पिंटो की कब्र में क्या मौजूद है? पुलिस को शक है कि विजय ने सैम की लाश को छिपाने के लिए पिंटो के शव का इस्तेमाल किया था। इसके साथ ही 23 जुलाई की घटनाओं को साबित करना भी जांच का अहम हिस्सा बन जाता है।
विजय ने पहले से तैयार कर रखी थी रिकॉर्डिंग
पुलिस को विजय के घर पर नजर रखने वाले लोगों से जुड़े सुराग मिलते हैं। इसी खतरे को भांपते हुए विजय ने अपने परिवार के साथ मिलकर अपनी आवाज की रिकॉर्डिंग पहले से तैयार कर ली थी। जब कोर्ट में यह रिकॉर्डिंग चलती है तो ऐसा लगता है कि 23 जुलाई को विजय घर पर ही था और परिवार से सामान्य बातचीत कर रहा था।
लेकिन असल में उस समय विजय घर पर मौजूद नहीं था। रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल पुलिस को यह विश्वास दिलाने के लिए किया गया था कि वह पूरे समय परिवार के साथ था। इस चाल ने जांच में एक बड़ी उलझन पैदा कर दी।
पिंटो की कब्र में मिला कंकाल भी असली नहीं
इसके बाद पुलिस क्रिस्टोफर पिंटो की कब्र की जांच करती है। वहां से एक कंकाल बरामद होता है, जिससे पहली नजर में लगता है कि पिंटो का शव कब्र में ही मौजूद था। अगर पिंटो का शव कब्र में था, तो पुलिस के पास मौजूद डीएनए सबूतों की पूरी कहानी बदल सकती थी।
यहीं विजय की दूसरी बड़ी चाल सामने आती है। फिल्म की कहानी के अनुसार, कब्र में रखा गया कंकाल असली मानव अवशेष नहीं बल्कि तैयार किया गया नकली कंकाल था। विजय ने अपनी फिल्म निर्माण से जुड़े संपर्कों का इस्तेमाल करके इसे तैयार कराया और जांच को भ्रमित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया।
पुलिस को कैसे नहीं हुआ शक?
विजय ने केवल कंकाल ही तैयार नहीं किया, बल्कि ऐसा माहौल भी बनाया जिससे कब्र को लेकर आगे की जांच मुश्किल हो जाए। चर्च और वहां मौजूद लोगों के बीच ऐसी स्थिति बनाई गई कि पुलिस के लिए अवशेषों को तुरंत अपने कब्जे में लेकर प्रयोगशाला जांच कराना आसान नहीं रहा।
इस तरह पुलिस के सामने मौजूद दोनों अहम सबूत—23 जुलाई की रिकॉर्डिंग और पिंटो की कब्र से मिला कंकाल—विजय की योजना का हिस्सा निकलते हैं।
आखिर में फिर बच गया विजय
क्लाइमैक्स में विजय की योजना काम कर जाती है और पुलिस उसके खिलाफ मौजूद सबूतों से निर्णायक रूप से यह साबित नहीं कर पाती कि उसने सैम की हत्या के बाद शव को छिपाया था। एक बार फिर वह कानूनी शिकंजे से बाहर निकल जाता है और अपने परिवार को बचाने में सफल रहता है।
‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ को हिंदी फ्रेंचाइजी की अंतिम कड़ी के रूप में पेश किया गया है। फिल्म ने विजय सालगांवकर की कहानी को इसी भाग में समाप्त करने का फैसला किया है।
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