वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य संघर्ष को रोकने में उनकी भूमिका अहम थी। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने दोनों देशों को अमेरिका के साथ व्यापार बंद करने और 250 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। उनका कहना है कि इस दबाव के बाद दोनों देशों ने गोलीबारी रोक दी।
फ्लोरिडा की रैली में किया दावा
23 अक्टूबर को फ्लोरिडा में आयोजित एक रैली के दौरान ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान को परमाणु हथियारों से लैस देश बताते हुए कहा कि उन्होंने दोनों को चेतावनी दी थी कि यदि संघर्ष जारी रहा, तो अमेरिका के साथ व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी बात से दोनों देश नाराज हुए, लेकिन बाद में लड़ाई रुक गई।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अब तक आठ बड़े युद्धों को समाप्त कराने में भूमिका निभाई है। इसके साथ ही उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर नाराजगी जताई और अपने कूटनीतिक प्रयासों का जिक्र किया।
भारत ने मध्यस्थता के दावे को नकारा
ट्रंप के दावे के विपरीत, भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने को लेकर सहमति दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के सीधे संपर्क के बाद बनी थी। भारत के अनुसार, पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) ने अपने भारतीय समकक्ष से संपर्क कर सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया था।
भारत ने पहले भी किसी तीसरे देश की मध्यस्थता के दावे को खारिज किया है। इसलिए संघर्षविराम को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति और भारत के आधिकारिक पक्ष में अंतर बना हुआ है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुआ था संघर्षविराम
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया था।
10 मई 2025 को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी। ट्रंप ने कई बार इस घटनाक्रम का श्रेय अपनी व्यापारिक चेतावनी को दिया है, जबकि भारत का कहना है कि संघर्षविराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क के बाद हुआ था।
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