नई दिल्ली। पाकिस्तान की सेना और देश की राजनीतिक स्थिति को लेकर पूर्व सिंगापुर राजदूत बिलाहारी कौशिकन की टिप्पणी चर्चा में है। एक हालिया पॉडकास्ट में उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति, सेना की भूमिका और सेना में बढ़ते धार्मिक प्रभाव को लेकर अपनी राय रखी। उनकी टिप्पणियां खास तौर पर फील्ड मार्शल असिम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तानी सेना के संदर्भ में सामने आई हैं।

कौशिकन के अनुसार, पाकिस्तान की स्थापना दक्षिण एशिया के मुसलमानों के लिए एक अलग देश के विचार पर हुई थी। उन्होंने तर्क दिया कि 1971 में बांग्लादेश के अलग होने के बाद पाकिस्तान की स्थापना के मूल तर्क को लेकर सवाल खड़े हुए। उन्होंने यह भी कहा कि आज पाकिस्तान की राजनीतिक और संस्थागत स्थिरता में सेना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है।

सेना के बदलते स्वरूप पर टिप्पणी

कौशिकन ने पाकिस्तान सेना के पुराने और मौजूदा स्वरूप में अंतर का दावा करते हुए कहा कि सेना पहले अपेक्षाकृत धर्मनिरपेक्ष संस्था मानी जाती थी, लेकिन समय के साथ उसमें धार्मिक प्रभाव बढ़ा है। उन्होंने सैनिकों के दाढ़ी रखने की अनुमति को भी इसी बदलाव के उदाहरण के रूप में पेश किया।

पाकिस्तान सेना में धार्मिक प्रभाव का मुद्दा नया नहीं है। विश्लेषणों के अनुसार जनरल जिया-उल-हक के शासनकाल के दौरान पाकिस्तानी सेना में इस्लामीकरण की प्रक्रिया तेज हुई थी। बाद के वर्षों में भी सेना की विचारधारा और धार्मिक भूमिका पर चर्चा होती रही है।

असिम मुनीर की धार्मिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में

पाकिस्तान के मौजूदा सैन्य नेतृत्व के संदर्भ में असिम मुनीर की धार्मिक पृष्ठभूमि भी अक्सर चर्चा का विषय रही है। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने रावलपिंडी के एक धार्मिक संस्थान में प्रारंभिक शिक्षा हासिल की थी और बाद में पाकिस्तान सेना में शामिल हुए। उन्हें कुरान कंठस्थ करने वाले हाफिज के रूप में भी जाना जाता है।

मुनीर नवंबर 2022 में पाकिस्तान के सेना प्रमुख बने थे और मई 2025 में उन्हें फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत किया गया। इसके बाद भी वे सेना प्रमुख की भूमिका में बने रहे।

पाकिस्तान की स्थिरता पर भी सवाल

कौशिकन ने पाकिस्तान की आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश लंबे समय से संकटों से जूझ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार होने के कारण वहां की आंतरिक अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ता है।

हालांकि, ये टिप्पणियां कौशिकन का विश्लेषण और राय हैं, इन्हें पाकिस्तान की आधिकारिक स्थिति या किसी स्वतंत्र तथ्यात्मक निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

Desk Desk · 07-10-2026 12:53 PM · 📍 Ranchi
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