पलामू | झारखंड के पलामू जिले में खरीफ फसल के बाद अब किसान रबी सीजन की तैयारियों में जुट गए हैं। खेतों में अगली फसल की तैयारी शुरू हो चुकी है और कई इलाकों में किसान कुल्थी की बुआई कर रहे हैं।

पलामू में खेती काफी हद तक मौसम और उपलब्ध नमी पर निर्भर करती है। ऐसे में खरीफ फसल के बाद खेतों में बची नमी का इस्तेमाल कर किसान कम अवधि वाली फसलों की बुआई शुरू कर देते हैं।

इस समय कुल्थी की खेती किसानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कुल्थी एक दलहन फसल है, जिसे अपेक्षाकृत कम पानी में भी उगाया जा सकता है। यही वजह है कि पलामू जैसे क्षेत्रों में जहां सिंचाई की सुविधा हर जगह पर्याप्त नहीं है, वहां किसान ऐसी फसलों को प्राथमिकता देते हैं।

कुल्थी की बुआई के साथ ही किसान अब रबी मौसम की मुख्य फसलों की तैयारी भी कर रहे हैं। आने वाले समय में खेतों में गेहूं, चना, मसूर, सरसों और अन्य रबी फसलों की बुआई का काम तेज होगा।

किसानों के लिए इस समय सबसे महत्वपूर्ण चीज खेतों में नमी की स्थिति है। समय पर बारिश और मिट्टी में पर्याप्त नमी रहने से रबी फसलों की बुआई बेहतर तरीके से हो सकती है। वहीं अगर मिट्टी में नमी कम रही तो किसानों को सिंचाई पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

पलामू में खेती की परिस्थितियां दूसरे कृषि क्षेत्रों से कुछ अलग हैं। यहां कई किसान सीमित सिंचाई संसाधनों के साथ खेती करते हैं। इसलिए कम पानी में तैयार होने वाली फसलें किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

कुल्थी की बुआई के साथ किसानों की नजर अब रबी सीजन की आगे की तैयारी पर है। किसान खेतों की जुताई, बीज की व्यवस्था और जरूरी कृषि सामग्री जुटाने में लगे हैं।

किसानों को उम्मीद है कि मौसम अनुकूल रहा और खेतों में पर्याप्त नमी बनी रही तो इस बार रबी फसलों की बुआई समय पर पूरी की जा सकेगी।

अब आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज और खेतों में नमी की स्थिति पलामू के किसानों के लिए काफी अहम रहने वाली है। रबी सीजन की शुरुआत के साथ जिले के ग्रामीण इलाकों में कृषि गतिविधियां भी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

यानी खरीफ के बाद अब पलामू में खेती का अगला दौर शुरू हो चुका है और किसान नई फसल के लिए खेत तैयार करने में जुट गए हैं।

Desk Desk · 09-09-2026 04:16 PM · 📍 Palamu
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