रामगढ़/गोला। गोला क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान ने सब्जी उत्पादक किसानों पर कहर बरपाया है। प्राकृतिक आपदा के कारण खेतों में लगी बोदी, लौकी, खीरा समेत कई तरह की नकदी सब्जी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं। फसलों को सहारा देने के लिए कड़ी मेहनत और लागत से खड़े किए गए मचान भी हवा के थपेड़ों को नहीं सह सके और क्षतिग्रस्त होकर जमीन पर आ गिरे।
मेहनत और पूंजी पर फिरा पानी
प्रभावित किसान ब्रजकिशोर महतो (पतरातु), बीरबल महतो (चौकाद), कंचन महतो (मुरुडीह) और पवन महतो (पतरातु) ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि सब्जी की खेती के लिए उन्होंने बीज, खाद, कीटनाशक दवाइयों, सिंचाई और मचान तैयार करने में भारी भरकम पूंजी लगाई थी। ठीक उस वक्त, जब फसल पूरी तरह तैयार होकर बाजार जाने के लिए ready थी, इस आपदा ने उनकी सारी उम्मीदों और महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
जीविका पर मंडराया आर्थिक संकट
फसलें पूरी तरह नष्ट हो जाने से किसानों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों का कहना है कि उनकी और उनके परिवारों की पूरी आजीविका सब्जी की बिक्री से होने वाली आय पर ही टिकी होती है। अब फसल पूरी तरह तबाह होने के बाद उनके सामने परिवार चलाने के साथ-साथ अगली फसल की बुआई के लिए पूंजी जुटाना एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।
तत्काल सर्वेक्षण और क्षतिपूर्ति की मांग
किसानों की इस बदहाली पर 'गोला दर्पण FPO' और स्थानीय किसान संगठनों ने चिंता जाहिर की है। उन्होंने झारखंड सरकार एवं रामगढ़ जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि प्रभावित गांवों में कृषि विभाग और संबंधित अधिकारियों की टीम को तुरंत भेजकर फसल क्षति का स्थलीय सर्वेक्षण (सर्वे) कराया जाए। संगठन ने मांग की है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित किसानों को सरकारी नियमों के तहत शीघ्र से शीघ्र उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें।
TEKLAL MAHTO TEKLAL MAHTO · 27-09-2026 05:45 PM · 📍 Ramgarh · RAMGARH Bureau
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