रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य के वामपंथी दलों ने SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर राज्यव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है। यह अभियान 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलाया जाएगा।
किन दलों ने शुरू किया अभियान?
इस अभियान में CPI(M), CPI, CPI(ML)-Liberation, Forward Bloc, RSP और SUCI(C) सहित वामपंथी दल शामिल हैं। रांची में संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान नेताओं ने कहा कि SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन, जनसभाएं और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। (
63 लाख से अधिक मतदाताओं का मुद्दा
वामदलों ने झारखंड में SIR के दौरान 63,24,116 मतदाताओं को नोटिस दिए जाने का मुद्दा उठाया है। निर्वाचन विभाग के अनुसार इनमें 45,55,227 मतदाता तार्किक विसंगतियों, 14,03,205 मतदाता नो-मैपिंग और 3,65,684 मतदाता समान जनसांख्यिकीय प्रविष्टियों से संबंधित सत्यापन की श्रेणी में हैं। नोटिस मिलने का अर्थ अपने आप में मतदाता का नाम हटना नहीं है; संबंधित मतदाताओं को अपना पक्ष और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।
चुनाव आयोग की नियुक्ति व्यवस्था में बदलाव की मांग
वामदलों ने केवल SIR रोकने की मांग ही नहीं की है, बल्कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की भी मांग रखी है। उनका प्रस्ताव है कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति की भूमिका हो।
सुप्रीम कोर्ट से जांच की मांग
वामदलों ने SIR और मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि जिन लोगों के नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर हुए हैं, उनके मतदान अधिकार बहाल किए जाने चाहिए। ये संबंधित राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोप और मांगें हैं; इन पर अंतिम निष्कर्ष अलग-अलग संस्थागत प्रक्रियाओं और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
झारखंड में SIR को लेकर अब राजनीतिक दलों के बीच मतदाता सूची, सत्यापन प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है।
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