केरेड़ारी/हजारीबाग: एनटीपीसी की चट्टी बरियातू कोल परियोजना से निकलने वाला दूषित एवं प्रदूषित पानी अब ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल बन गया है।
कहां-कहां पहुंच रहा दूषित पानी
परियोजना से निकला प्रदूषित पानी *काबेद, बालेदेवरी और लोचर* होते हुए बड़कागांव क्षेत्र तक पहुंच रहा है। इस गंदे पानी के कारण पूरे इलाके की कृषि, पशुपालन और ग्रामीणों का जनजीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
किसानों की फसलें बर्बाद
इस क्षेत्र के किसान दशकों से इसी नदी के पानी से आलू, सरसों, गेहूं, सब्जी और अन्य फसलों की खेती करते आ रहे हैं। यही उनकी आजीविका का मुख्य आधार है। लेकिन दूषित पानी से खेतों की उर्वरता घट रही है। फसलें, सब्जियां और फल नष्ट हो रहे हैं जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पशुओं पर भी खतरा
स्थिति इतनी खराब है कि पशुओं के लिए भी स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा। दूषित पानी पीने से पशुओं के बीमार होने का खतरा बढ़ गया है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर संकट
यह सिर्फ खेती का सवाल नहीं है। यह पर्यावरण, जल स्रोतों और हजारों ग्रामीणों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी प्रबंधन से मांग की है कि:
1. प्रदूषित पानी को नदी में छोड़ने पर त्काल रोक लगाई जाए
2. स्थायी समाधान के लिए ट्रीटमेंट प्लांट और वैकल्पिक व्यवस्था की जाए
3. प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए
4. क्षेत्र में स्वच्छ जल और पर्यावरण की रक्षा सुनिश्चित की जाए
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