रामगढ़। जिले में मौसमी इन्फ्लुएंजा एवं H1N1 (स्वाइन फ्लू) संक्रमण की संभावित स्थिति से निपटने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने को लेकर जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। उपायुक्त, रामगढ़ के निर्देश के आलोक में सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनिल कुमार एवं जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट की टीम द्वारा स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
RBSK के तहत बच्चों की स्वास्थ्य जांच में तेजी लाने के निर्देश
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत स्कूली बच्चों की स्वास्थ्य जांच एवं उपचार व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए सभी चिकित्सा पदाधिकारियों को माइक्रो प्लान तैयार कर लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें चिह्नित विद्यालयों एवं स्थलों पर जाकर बच्चों एवं अभिभावकों को आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक एवं प्रेरित करेंगी, ताकि कोई भी जरूरतमंद बच्चा स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे।
RBSK कैंप के सफल संचालन के लिए स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। संबंधित विद्यालयों में आयोजित होने वाले स्वास्थ्य शिविरों में शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों एवं विद्यालय प्रबंधन की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।
साथ ही, DRCHO सह नोडल पदाधिकारी को RBSK रोस्टर के अनुसार बच्चों के डेटा को फिल्टर करते हुए चिह्नित बच्चों को उपलब्ध कराए गए उपचार, आवश्यक सुविधाओं एवं नियमानुसार मिलने वाले राशन आदि की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
अस्पतालों में विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार करने का निर्देश
H1N1 सहित संक्रामक रोगों से निपटने के लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार ने सभी MOIC एवं DS को अस्पतालों में सामान्य वार्डों से अलग विशेष आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने का निर्देश दिया है। वार्ड में आवश्यक जीवनरक्षक दवाएं, चिकित्सा उपकरण एवं अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को तत्काल उपचार एवं बेहतर रेफरल सुविधा उपलब्ध कराने को कहा गया है।
H1N1 की पहचान, रोकथाम एवं रिपोर्टिंग पर विशेष जोर
स्वास्थ्य पदाधिकारियों एवं चिकित्सा कर्मियों के लिए H1N1 की पहचान, रोकथाम, संक्रमण नियंत्रण, नमूना संग्रह, रेफरल एवं उपचार संबंधी दिशा-निर्देशों को लेकर उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार एवं डॉ. सत्य प्रकाश के मार्गदर्शन में स्वास्थ्यकर्मियों को संदिग्ध मामलों की समय पर पहचान एवं निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने की जानकारी दी गई।
सिविल सर्जन ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों को H1N1 के संभावित मामलों को लेकर सतर्क रहने तथा आवश्यक संसाधनों एवं व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि संदिग्ध मामलों की शीघ्र पहचान, समय पर रिपोर्टिंग एवं उचित उपचार से संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
लेप्टोस्पायरोसिस की निगरानी एवं रिपोर्टिंग को मजबूत करने का निर्देश
जिले में लेप्टोस्पायरोसिस की निगरानी एवं रिपोर्टिंग पर भी विशेष जोर दिया गया है। सभी संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों को संदिग्ध मामलों की समय पर पहचान, जांच, उपचार एवं नियमित रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
लेप्टोस्पायरोसिस के संभावित लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, उल्टी एवं आंखों में लालिमा आदि शामिल हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में पीलिया एवं किडनी संबंधी जटिलताएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। विशेष रूप से बाढ़, जलभराव, दूषित पानी अथवा संक्रमित पशुओं के मूत्र से दूषित वातावरण के संपर्क में रहने वाले लोगों में संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा आमजनों से अपील की गई है कि साफ पानी का उपयोग करें, जलभराव एवं दूषित पानी के अनावश्यक संपर्क से बचें तथा बीमारी से संबंधित लक्षण दिखाई देने पर घबराएं नहीं, बल्कि तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा चिकित्सक से संपर्क करें।
सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि जिले में संक्रामक रोगों की रोकथाम, बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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