नई दिल्ली। वंदे मातरम् के गायन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी सामने आई है। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति धार्मिक कारणों से वंदे मातरम् नहीं गाता या इसके सभी छह अंतरे नहीं गाता, तो केवल इस आधार पर उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह मामला कर्नाटक संगीत के प्रसिद्ध गायक टी. एम. कृष्णा की याचिका से जुड़ा है। याचिका में वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाने की अनिवार्यता पर सवाल उठाया गया है। अदालत ने संकेत दिया कि इस मामले में 1986 के बिजो एमैनुअल फैसले में स्थापित सिद्धांतों को ध्यान में रखना होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल यह तय करने से इनकार किया है कि राष्ट्रगीत को केवल दो अंतरों तक सीमित किया जाना चाहिए या छह अंतरे होने चाहिए। हालांकि, अदालत इस कानूनी सवाल पर विचार कर रही है कि वंदे मातरम् नहीं गाने को दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है या नहीं।
सरकार की ओर से 2026 में किए गए कानूनी संशोधन के तहत वंदे मातरम् को राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून के दायरे में लाया गया है। हालांकि, उपलब्ध सरकारी विवरण के अनुसार कानून मुख्य रूप से राष्ट्रगीत के गायन को जानबूझकर रोकने या उसके गायन में व्यवधान डालने को दंडनीय बनाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र से जवाब मांगा है। मामले की आगे की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि राष्ट्रगीत के सम्मान और व्यक्तिगत मौलिक अधिकारों के बीच कानूनी स्थिति क्या होगी।
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