रांची। झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में माना कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। JSSC-CGL परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई पूरी हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
सरकार ने परीक्षा रद्द करने के फैसले का किया बचाव
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने दलील दी कि जांच में प्रश्नपत्र लीक होने, अभ्यर्थियों तक प्रश्न और उत्तर पहुंचने तथा अन्य अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। सरकार के अनुसार, इन परिस्थितियों ने पूरी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया को जारी रखना उचित नहीं होगा।
सरकार ने यह भी कहा कि जांच के दौरान कई गिरफ्तारियां हुई हैं और मामले की पड़ताल अभी जारी है। सरकार का तर्क था कि जब अनियमितता का दायरा व्यापक हो, तो केवल दोषी अभ्यर्थियों की पहचान कर बाकी उम्मीदवारों को अलग करना मुश्किल हो जाता है।
अभ्यर्थियों ने फैसले को दी चुनौती
परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द किए जाने के खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए अपने पक्ष में दलीलें रखी गईं। मामले में अदालत को यह तय करना है कि सरकार द्वारा परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने का निर्णय कानूनी रूप से उचित था या नहीं।
अब अदालत के फैसले पर टिकी नजरें
JSSC-CGL मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। वहीं, JPSC से संबंधित मामले में सुनवाई आगे जारी रहने की जानकारी दी गई है। अदालत का अंतिम निर्णय अभ्यर्थियों और राज्य की भर्ती प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण होगा।
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