धनबाद। कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (CMPFO) के DHFL में डूबे 727.67 करोड़ रुपये के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया है। गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया।
मामला कोयला कर्मियों के भविष्य निधि से जुड़े उस निवेश का है, जिसमें CMPFO ने DHFL में करीब 1,300 करोड़ रुपये लगाए थे। DHFL के दिवालिया होने के बाद इस निवेश का बड़ा हिस्सा फंस गया और करीब 727.67 करोड़ रुपये की राशि वापस नहीं मिल सकी।
निवेश को लेकर उठे सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया कि DHFL की आर्थिक स्थिति खराब होने के संकेत पहले ही मिल चुके थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, CMPFO के फंड मैनेजर SBI और UTI ने जून 2019 में निवेश को लेकर चेतावनी जारी की थी और रकम निकालने की सलाह दी थी। इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
बाद में 20 दिसंबर 2019 को CMPFO की बैठक में फंसी रकम की वापसी के लिए कदम उठाने का प्रस्ताव पारित किया गया। हालांकि, पूरी राशि की वसूली नहीं हो सकी। इसके बाद नवंबर 2021 में 727.67 करोड़ रुपये को राइटऑफ करने का प्रस्ताव सामने आया, जिस पर कर्मचारियों की ओर से आपत्ति जताई गई।
अब CBI करेगी पूरे मामले की जांच
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सीबीआई निवेश से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। इसमें DHFL में इतनी बड़ी रकम निवेश करने का निर्णय, जोखिम की जानकारी मिलने के बाद उठाए गए कदम, रकम की वसूली के प्रयास और बाद में राशि को राइटऑफ करने की प्रक्रिया जैसे पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।
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