पूर्वी सिंहभूम | झारखंड में पारा शिक्षकों से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। पूर्वी सिंहभूम जिले के 38 पारा शिक्षकों को झारखंड हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने इन शिक्षकों को सेवा से हटाने और उनका मानदेय रोकने के जिला शिक्षा अधीक्षक के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही अदालत ने अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान करने का निर्देश भी दिया है।
पूरा मामला पारा शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता और प्रमाण पत्रों की मान्यता से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ शिक्षकों के मैट्रिक और इंटरमीडिएट के प्रमाण पत्र इलाहाबाद और देवघर के कुछ ऐसे संस्थानों से जुड़े थे, जिनकी मान्यता को लेकर सवाल उठाए गए थे। इनमें इंटर प्रयाग महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद, हिंदी महिला विद्यापीठ, इलाहाबाद और हिंदी विद्यापीठ, देवघर जैसे संस्थानों के प्रमाण पत्र शामिल बताए गए हैं।
इसी मामले में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद यानी JEPC ने 7 नवंबर 2025 को एक पत्र जारी किया था। इसके बाद अलग-अलग जिलों में जिला शिक्षा अधीक्षकों के माध्यम से संबंधित अधिकारियों और स्कूलों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसी क्रम में पूर्वी सिंहभूम के जिला शिक्षा अधीक्षक ने संबंधित पारा शिक्षकों को काम से हटाने और उनका मानदेय रोकने का आदेश जारी किया था।
इस कार्रवाई के खिलाफ मेरी मुर्मू और अन्य पारा शिक्षकों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ताओं ने सेवा से हटाने और मानदेय रोकने के आदेश को चुनौती दी और बकाया मानदेय के भुगतान की मांग भी की।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने जिला शिक्षा अधीक्षक के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत पारा शिक्षकों को सेवा से हटाने और मानदेय रोकने की कार्रवाई की गई थी।
हाईकोर्ट के फैसले में संबंधित शिक्षकों के लिए एक और महत्वपूर्ण राहत दी गई है। अदालत ने अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यानी जिन शिक्षकों का मानदेय इस अवधि से रुका हुआ था, उनके बकाये के भुगतान का रास्ता साफ हो गया है।
इस फैसले से पूर्वी सिंहभूम के संबंधित पारा शिक्षकों को फिलहाल सेवा और मानदेय, दोनों मामलों में राहत मिली है। हालांकि, इस फैसले को राज्य के सभी पारा शिक्षकों के लिए स्वतः लागू होने वाला नियमितीकरण या सभी विवादित प्रमाण पत्रों की सामान्य मान्यता का आदेश समझना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्ट में राहत संबंधित याचिकाकर्ता शिक्षकों के मामले में दी गई है।
कुल मिलाकर, शैक्षणिक प्रमाण पत्रों को लेकर शुरू हुई कार्रवाई के बाद नौकरी और मानदेय पर संकट झेल रहे पूर्वी सिंहभूम के पारा शिक्षकों के लिए हाईकोर्ट का यह फैसला महत्वपूर्ण है। सेवा से हटाने और मानदेय रोकने का आदेश रद्द होने के साथ अप्रैल 2025 से बकाया मानदेय मिलने का निर्देश भी दिया गया है।
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