नई दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सेवा कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला है। 21 से 23 अक्टूबर तक खुले इस आईपीओ को कुल मिलाकर 22.19 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इस मजबूत मांग के बाद अब निवेशकों की नजर शेयरों के आवंटन और संभावित लिस्टिंग पर टिकी है।
इस आईपीओ का कुल आकार लगभग ₹30,213 करोड़ था। शेयरों का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 तय किया गया था। बाजार में इसकी संभावित लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने की उम्मीद है, जबकि शेयर आवंटन की प्रक्रिया 26 अक्टूबर को पूरी होने की संभावना है।
संस्थागत निवेशकों ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी
आईपीओ में सबसे अधिक मांग योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) की ओर से देखने को मिली। इस श्रेणी में सब्सक्रिप्शन लगभग 70 गुना से अधिक रहा। वहीं, खुदरा निवेशकों की श्रेणी में करीब 2.72 गुना आवेदन मिले। कुल सब्सक्रिप्शन के आंकड़े बताते हैं कि जियो प्लेटफॉर्म्स को लेकर बाजार में मजबूत दिलचस्पी बनी हुई है।
ग्रे मार्केट में प्रीमियम के संकेत
आईपीओ बंद होने के बाद ग्रे मार्केट में जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों का अनौपचारिक प्रीमियम लगभग ₹250 के आसपास बताया गया। ₹1,119 के ऊपरी इश्यू प्राइस के आधार पर इससे करीब ₹1,369 की सांकेतिक लिस्टिंग कीमत का अनुमान निकलता है। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम आधिकारिक आंकड़ा नहीं है और इसमें तेजी से बदलाव हो सकता है। इसे लिस्टिंग के वास्तविक भाव या मुनाफे की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।
मेटा और गूगल जैसे निवेशकों से जुड़ी कंपनी
जियो प्लेटफॉर्म्स दूरसंचार और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में रिलायंस समूह की प्रमुख कंपनी है। इसके पुराने निवेशकों में मेटा और गूगल जैसी वैश्विक टेक कंपनियां शामिल हैं। कंपनी की बाजार स्थिति, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और भविष्य में कारोबार बढ़ाने की संभावनाएं निवेशकों की दिलचस्पी के प्रमुख कारणों में गिनी जा रही हैं।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
आईपीओ को मिला मजबूत सब्सक्रिप्शन और ग्रे मार्केट में प्रीमियम निवेशकों के सकारात्मक रुझान का संकेत देते हैं। फिर भी, वास्तविक लिस्टिंग कीमत बाजार की परिस्थितियों और शेयरों की मांग पर निर्भर करेगी। निवेशकों को केवल ग्रे मार्केट के अनुमान के आधार पर फैसला लेने के बजाय कंपनी की वित्तीय स्थिति, जोखिम और अपने निवेश लक्ष्य को भी ध्यान में रखना चाहिए।
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