रांची |देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का बड़ा बयान सामने आया है।

निशिकांत दुबे ने SIR का बचाव करते हुए दावा किया कि देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी हर छह महीने में मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराना चाहते थे। उनके मुताबिक, उस समय आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण ऐसा नियमित रूप से नहीं हो सका।

दुबे ने यह बयान ऐसे समय दिया है, जब SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष की ओर से मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर कई आरोप लगाए गए हैं।

इस विवाद के बीच निशिकांत दुबे ने चुनाव आयोग के अधिकारियों को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कुछ पूर्व चुनाव आयुक्तों के बाद में कांग्रेस से जुड़े पदों या राजनीतिक गतिविधियों का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर उठ रहे सवालों पर भी दुबे ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर प्रेस रिलीज के जरिए जवाब दिया जा चुका है।

दरअसल, हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कई फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें SIR के दौरान फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता डेटाबेस से जुड़े मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं।

हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से इन मतभेदों को लेकर कहा गया है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और SIR समेत महत्वपूर्ण फैसले आयोग ने सर्वसम्मति से लिए हैं।

यानी SIR को लेकर विवाद अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची में किए जा रहे बदलाव भी चर्चा के केंद्र में हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच बहस और तेज होने की संभावना है।

Desk Desk · 24-09-2026 05:35 PM · 📍 Ranchi
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