रांची। झारखंड की DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केंद्र ने आरोप लगाया है कि झारखंड सरकार ने DGP नियुक्ति के लिए बनाई गई 2025 की नियमावली में सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया।
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा। अदालत ने केंद्र की अर्जी पर सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। केंद्र ने मांग की है कि 2025 की नियमावली के तहत की गई DGP नियुक्तियों को अवैध घोषित किया जाए और झारखंड को सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया के अनुसार नई नियुक्ति करने का निर्देश दिया जाए।
केंद्र ने विशेष रूप से तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर सवाल उठाया है। मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को DGP नियुक्त किया गया था, जबकि वह अगले ही दिन सेवानिवृत्त होने वाली थीं। इससे पहले राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन कर DGP नियुक्ति के लिए छह महीने की न्यूनतम शेष सेवा की शर्त हटा दी थी।
केंद्र ने पूर्व DGP अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को भी चुनौती दी है। उसका कहना है कि झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का चयनात्मक तरीके से इस्तेमाल किया—दो साल के कार्यकाल की व्यवस्था को अपनाया, लेकिन DGP चयन के लिए UPSC से संबंधित अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
मामला सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले से जुड़े पुलिस सुधार संबंधी दिशा-निर्देशों के तहत विचाराधीन है। अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि झारखंड की 2025 की DGP नियुक्ति नियमावली और उसके आधार पर हुई नियुक्तियां निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हैं या नहीं।
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