नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर उम्मीदें बढ़ रही हैं। लगातार बढ़ती महंगाई और दैनिक जरूरतों पर होने वाले खर्च को देखते हुए कर्मचारी संगठन इस बार वेतन में बेहतर बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। इस चर्चा में फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम मूल वेतन और महंगाई भत्ते (DA) तथा महंगाई राहत (DR) को लेकर कई अहम प्रस्ताव सामने आए हैं।
महंगाई भत्ते में पिछले कुछ वर्षों के दौरान हुई बढ़ोतरी को कर्मचारी संगठन अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग का एक प्रमुख आधार मान रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जुलाई 2023 में 46 प्रतिशत रहा DA जनवरी 2026 तक बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया। कर्मचारियों का तर्क है कि बढ़ती कीमतों के कारण उनकी वास्तविक खर्च करने की क्षमता पर दबाव पड़ता है, इसलिए नए वेतन निर्धारण में इसका उचित ध्यान रखा जाना चाहिए।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक है, जिसके आधार पर पुराने मूल वेतन को नए वेतन ढांचे में निर्धारित किया जाता है। सातवें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। अब आठवें वेतन आयोग के लिए विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने इससे अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के कर्मचारी पक्ष ने 3.833 के फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम मूल वेतन 69,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा है।
हालांकि, कर्मचारी संगठनों की मांगों को अंतिम सरकारी निर्णय नहीं माना जा सकता। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही नए वेतनमान, न्यूनतम वेतन तथा पेंशन संबंधी बदलावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें फैसले पर
आठवें वेतन आयोग से कर्मचारियों को केवल मूल वेतन में बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि महंगाई के अनुरूप बेहतर आर्थिक राहत की भी उम्मीद है। वहीं, पेंशनभोगी भी महंगाई राहत और पेंशन में संभावित बदलावों को लेकर निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल फिटमेंट फैक्टर कितना तय होगा और वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी कितनी होगी, इस पर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
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