नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि आगामी केंद्रीय बजट से पहले होने वाले परामर्श के दौरान सरकार भारतीय और विदेशी निवेशकों के सुझाव सुनेगी। मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में उन्होंने LTCG टैक्स, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और अलग-अलग निवेश विकल्पों पर कर व्यवस्था को लेकर जारी बहस को महत्वपूर्ण बताया।
LTCG और STT पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?
वित्त मंत्री के अनुसार, निवेशक शेयर बाजार में लगने वाले LTCG टैक्स और STT को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों पर कर लगाने के नियमों में समानता होनी चाहिए या नहीं, इस पर भी चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि बजट से पहले होने वाले विचार-विमर्श में इन मुद्दों पर विभिन्न पक्षों की राय सुनी जाएगी।
क्या खत्म हो सकता है LTCG टैक्स?
फिलहाल सरकार ने LTCG टैक्स समाप्त करने या इसकी दर घटाने की कोई घोषणा नहीं की है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 20 जुलाई 2026 को लोकसभा में बताया था कि घरेलू और खुदरा निवेशकों के लिए इस टैक्स को खत्म करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत पात्र सूचीबद्ध इक्विटी शेयरों और इक्विटी म्यूचुअल फंड की इकाइयों को 12 महीने से अधिक समय तक रखने के बाद बेचने पर होने वाले निर्धारित दीर्घकालिक लाभ पर 12.5 प्रतिशत LTCG टैक्स लागू होता है। एक वित्त वर्ष में ऐसे पात्र लाभ के पहले 1.25 लाख रुपये पर छूट उपलब्ध है। STT शेयर बाजार के कुछ लेन-देन पर अलग से लगाया जाता है।
विदेशी निवेशकों की निकासी के बीच बढ़ी चर्चा
भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी के बीच टैक्स व्यवस्था को अधिक आकर्षक बनाने की मांग भी उठ रही है। SBI रिसर्च ने सुझाव दिया है कि इक्विटी निवेश की होल्डिंग अवधि दो से तीन वर्ष करने और LTCG टैक्स हटाने पर विचार किया जाए, ताकि बाजार में दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहन मिल सके।
हालांकि, वित्त मंत्री के बयान को टैक्स में बदलाव का संकेत या अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। अब निवेशकों की नजर आगामी बजट और सरकार की आधिकारिक घोषणाओं पर रहेगी।
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