नई दिल्ली। दिवाली से पहले देश में चीनी की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ने के साथ बाजार में चीनी की सीमित उपलब्धता ने कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। इसका असर आम उपभोक्ताओं के साथ मिठाई कारोबारियों और खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों पर भी पड़ सकता है।
बाजार में तेजी की प्रमुख वजह घरेलू चीनी उत्पादन का अनुमान से कम रहना है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और फसल को हुए नुकसान ने उत्पादन को प्रभावित किया है। वहीं, दिवाली के मद्देनजर घरों, मिठाई दुकानों, बेकरी और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में चीनी की मांग बढ़ रही है।
14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों की बिक्री दर 6 अक्टूबर को 4,600 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 12 अक्टूबर को 5,200 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। इसी अवधि में महाराष्ट्र में यह दर 4,350 रुपये से बढ़कर 5,100 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई। ये चीनी मिलों की दरें हैं, खुदरा बाजार में ग्राहकों को मिलने वाली कीमतें नहीं।
कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के 10 लाख टन तक शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा, जमाखोरी रोकने और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए चीनी के भंडारण पर सीमाएं लागू की गई हैं। सरकार ने चीनी मिलों को पेराई सत्र जल्द शुरू करने की दिशा में भी कदम उठाने को कहा है, ताकि बाजार में नई चीनी की उपलब्धता बढ़ सके।
हालांकि, त्योहारों से पहले कीमतों में आगे कितनी तेजी आएगी, यह उत्पादन, बाजार में वास्तविक आपूर्ति और सरकारी उपायों के प्रभाव पर निर्भर करेगा। उपभोक्ताओं को राहत मिलने के लिए जरूरी है कि बाजार में पर्याप्त चीनी पहुंचे और जमाखोरी जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रहे।
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