अपनी राइफल नहीं, किराये के हथियार से देशभर में कर रही हैं मुकाबला
विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्रीय स्तर पर जीता रजत पदक
राइफल किराये पर लेने में परिवार पर पांच से छह लाख रुपये का आर्थिक बोझ
मुख्यमंत्री से मदद की आस लगाए बैठी हैं राष्ट्रीय पदक विजेता
सचिन सिंह, रांची ,उजाला । राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड का नाम रोशन करने वाली रांची की निशानेबाज सुप्रिया कुमारी पिछले तीन वर्षों से राइफल लाइसेंस के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रही हैं। लाइसेंस नहीं मिलने के कारण उन्हें राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हर बार किराये या उधार की राइफल से हिस्सा लेना पड़ रहा है, जिससे परिवार पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
सुप्रिया ने वर्ष 2023 में राइफल लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। उनका कहना है कि आवेदन के बाद उन्होंने कई बार रांची उपायुक्त कार्यालय में अपनी बात रखी और प्रतियोगिताओं में भाग लेने की आवश्यकता बताते हुए शीघ्र लाइसेंस जारी करने का अनुरोध किया, लेकिन अब तक आवेदन लंबित है।
सुप्रिया के पिता विष्णु नाग के अनुसार, पिछले सात वर्षों में राष्ट्रीय और अन्य प्रतियोगिताओं के लिए राइफल किराये पर लेने में पांच से छह लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर लाइसेंस मिल जाता तो अब तक निजी राइफल खरीदी जा सकती थी, जिससे यह अतिरिक्त खर्च बच जाता।
आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद सुप्रिया का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। उन्होंने वर्ष 2024 में राष्ट्रीय शूटिंग प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर झारखंड को गौरवान्वित किया। इसके अलावा वे कई बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक तथा ईस्ट जोन शूटिंग चैंपियनशिप में भी रजत पदक हासिल कर चुकी हैं। उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना है।
शूटिंग खिलाड़ियों के लिए आर्म्स एक्ट, 1959 एवं आर्म्स रूल्स, 2016 के तहत हथियार का लाइसेंस प्राप्त करना आवश्यक होता है। लाइसेंस जारी होने के बाद ही खिलाड़ी प्रतियोगी राइफल खरीद सकता है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि कई राज्यों में राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लाइसेंस आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निस्तारण किया जाता है, ताकि उनके प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं की तैयारी प्रभावित न हो।
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