रांची | झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी PDS को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य की 25 हजार से अधिक राशन दुकानों के जरिए लाभुकों तक खाद्यान्न की नियमित और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 172.73 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है।
यह राशि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राशन के परिवहन, खाद्यान्न की हैंडलिंग और PDS डीलरों के मार्जिन के भुगतान में इस्तेमाल होगी। इसका सीधा उद्देश्य गोदामों से राशन दुकानों तक अनाज पहुंचाने की प्रक्रिया को सुचारु बनाना और वितरण व्यवस्था में रुकावट कम करना है।
राशि का एक हिस्सा भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों से राज्य के खाद्य निगम के गोदामों तक अनाज पहुंचाने में खर्च होगा। इसके बाद गोदामों से PDS दुकानों तक डोर-स्टेप डिलीवरी के लिए परिवहन एजेंसियों को भुगतान किया जाएगा। वहीं, राशन वितरण के बदले दुकानदारों को मिलने वाला कमीशन भी इसी व्यवस्था के तहत दिया जाएगा।
झारखंड में NFSA के तहत सभी 24 जिलों के करीब 60.55 लाख परिवार जुड़े हुए हैं। इनमें लगभग 2.62 करोड़ लाभुक शामिल हैं। इनमें प्राथमिकता वाले परिवार (PHH) और अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के लाभुक शामिल हैं।
सरकार का दावा है कि परिवहन और डीलर भुगतान की व्यवस्था बेहतर होने से राशन की आपूर्ति अधिक नियमित होगी। साथ ही ई-पॉस जैसी डिजिटल व्यवस्था के जरिए वितरण प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार ने 2026 से 2031 तक PDS में राशन परिवहन और हैंडलिंग से जुड़ी योजना को जारी रखने के लिए 25,530 करोड़ रुपये के केंद्रीय परिव्यय को मंजूरी दी है। झारखंड को जारी की गई राशि इसी व्यापक व्यवस्था के तहत है।
इस पहल का सबसे बड़ा असर उन करोड़ों लाभुकों पर पड़ने की उम्मीद है, जो सरकारी राशन व्यवस्था पर निर्भर हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि परिवहन, डोर-स्टेप डिलीवरी और राशन वितरण की व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है।
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