उजाला , ब्यूरो । रितिका ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की डिग्री हासिल की है. इस दौरान उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया. उन्होंने बताया कि साल 2019 में पंजाब के मोहाली में काम करने के दौरान आईपीएल मैच देखते हुए उनके मन में अंपायर बनने का विचार आया. उस समय वह आईटीआई प्रोफेशनल के तौर पर काम कर रही थीं.
कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान नौकरी के सीमित अवसरों के कारण उन्हें अपने गृह नगर सेलम लौटना पड़ा. यहीं से उनके अंपायरिंग करियर की शुरुआत हुई. उन्होंने सेलम डिस्ट्रिक्ट एसोसिएशन के अंपायर कमेटी चेयरमैन जयारमन से संपर्क किया. जिसके बाद उन्होंने मौका देने का वादा किया.
शुरुआत में हुई कई गलतियां
शुरुआती दौर आसान नहीं था. रितिका ने स्वीकार किया कि करियर की शुरुआत में उनसे कई गलतियां हुईं और उन्हें आलोचना का सामना भी करना पड़ा. उन्होंने कहा, “लोग डांटते थे, तब मुझे लगा कि मैं इस काम के लिए फिट नहीं हूं. लेकिन इस दौरान जयारमन ने उन्हें लगातार प्रोत्साहित किया और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.”
अपने जेंडर को लेकर सच बताने का फैसला भी उनके लिए चुनौतीपूर्ण था. उन्हें डर था कि इससे उनका करियर प्रभावित हो सकता है. लेकिन जयारमन और उनके परिवार ने उनका पूरा साथ दिया. उन्होंने कहा कि जब सरकार तीसरे जेंडर को अवसर देने की बात करती है, तो फिर मुझे क्यों नहीं. इस सोच के साथ उन्हें बाकियों का समर्थन मिला.
300 मैचों से ज्यादा मैचों में की है अंपायरिंग
ट्रांजिशन के बाद उन्हें कोयंबटूर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (CDCA) में भी अवसर मिला, जहां उन्होंने स्थानीय लीग मैचों में अंपायरिंग की। रितिका मानती हैं कि एसोसिएशन का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना. रितिका ने इस दौरान 300 से भी ज्यादा मैचों में अंपायरिंग की.
धोनी की फैन है रितिका
उन्होंने कहा कि मेरा सपना है कि एक दिन मैं आईपीएल के मैच में और भारत के लिए इंटरनेशनल मैच में अंपायरिंग करूं. मेरा सपना है कि मैं विराट कोहली, रोहित शर्मा, एमएस धोनी के मैचों में अंपायरिंग करूं. मैं धोनी की बहुत बड़ी फैन हूं.


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