नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि की शुरुआत रविवार, 11 अक्टूबर 2026 से हो रही है। इस दिन मां दुर्गा के भक्त कलश स्थापना के साथ नौ दिनों की पूजा-अर्चना शुरू करेंगे। काशी के पंचांगों के अनुसार, इस बार घटस्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। यानी श्रद्धालुओं को इस विशेष मुहूर्त में कलश स्थापना के लिए कुल 48 मिनट का समय मिलेगा।
अभिजीत मुहूर्त में करें कलश स्थापना
ज्योतिर्विद दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त को उपयुक्त माना गया है। इस दौरान श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार घटस्थापना कर सकते हैं। पूजा में किसी तरह की जल्दबाजी से बचने के लिए आवश्यक सामग्री पहले से जुटा लेना बेहतर होगा।
चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग
इस वर्ष नवरात्रि के पहले दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन परिस्थितियों में घटस्थापना के मुहूर्त का चयन विशेष सावधानी से किया जाता है। इसी कारण काशी के पंचांगों में अभिजीत मुहूर्त को ध्यान में रखने की सलाह दी गई है।
कब शुरू होगी प्रतिपदा तिथि?
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से मानी जाएगी। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
कलश स्थापना से पहले तैयार रखें पूजा सामग्री
घटस्थापना से पहले पूजा स्थल की सफाई कर लें और कलश, जल, नारियल, आम या अशोक के पत्ते, रोली, अक्षत, फूल तथा दीपक जैसी जरूरी सामग्री तैयार रखें। जिन घरों में जौ बोने की परंपरा है, वहां उसके लिए मिट्टी और पात्र की व्यवस्था भी पहले से कर लें।
कलश स्थापना को नवरात्रि की पूजा का शुभारंभ माना जाता है। इसके बाद श्रद्धालु नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करते हैं। व्रत और पूजा की विधि परिवार की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
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